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ज्योतिष में दूसरा भाव second house

 ॐ नमः शिवाय

नमस्कार दोस्तों,

       आज बात करते है दूसरा भाव की, दूसरा भाव हमारे रिसोर्सेज है , जीवन जीने के साधन है , भगवान विष्णु श्रृष्टि पालन करता है तो लक्ष्मी उनकी सहयोगी शक्ति है यही लक्ष्मी धन लक्ष्मी, अन्न पूर्णा और परिजनों के रूप में दूसरे भाव में समाहित है यानी दूसरा भाव है 

हमारे परिवार का

हमारे धन का

भोजन का

शरीर के अंगों में ज्ञानेंद्रियों का ( आंख, कान, नाक, रसना) का

नैसर्गिक राशि वृषभ एक बैल जो कि वाहन है भगवान शिव के, इसके स्वामी शुक्र( देवी लक्ष्मी) है।

मां का दूध याद आता है न समय समय पर, हा वही जो शिशु के लिए जरूरी और सेहत के लिए अच्छा भोजन होता है। तो भोजन दूसरे भाव में मां का दूध चंद्र उच्च का होता है न, यही चंद्र कैश फ्लो भी है। 

धन के रूप में क्या चाहिए सभी को , सोना न, परिवार में क्या चाहिए वृद्धि और सुख न तो ये सोना और वृद्धि गुरु की है तो यही गुरु दूसरे भाव का कारक बन जाता है।

बेसिक शिक्षा जानकारी दूसरे भाव से ही लेगे क्युकी बेसिक ज्ञान न हुआ तो जीना किस काम का

तो अगर दिक्कत है कैश फ्लो की तो लो मदद चंद्र यानी मां की, छू लो उनके पैर, बना लो एक अकाउंट मां के नाम, 

चाहिए मान सम्मान, जीवन में तरक्की और कोष में सोना तो कर लो पूजा गुरु की, करो शिरोधार्य आज्ञा उनकी, लो सलाह हर काम में फिर देखो मजा

फिर भी आ रही दिक्कत खत्म नहीं हो रही तो देखो कही लाईफ पार्टनर को दुखी तो नहीं किया क्युकी शुक्र खुश है तो लक्ष्मी है नहीं तो अलक्ष्मी बनते देर नहीं लगती। 

बुजुर्ग औरत मां समान ( दादी) कारक है तीनों ग्रह का ( शुक्र औरत, चंद्र मां और गुरु बुजुर्ग) तो थोड़ी देर बैठ जाओ दादी के पास , नहीं दादी है तो उनकी उम्र की स्त्री के साथ बेकार कुछ गप्पे ही लगा लो फिर देखो बदलाव

नोट: उपरोक्त उपाय साधारण उपाय है जो कि बेशक धीरे धीरे फल दे लेकिन शास्वत है , विशेष उपाय कुंडली अनुसार किसी अच्छे जानकार से ही ले।

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